ओ वुमनिया! कुछ घंटों के लिए ही सही इस दुनिया की परवाह छोड़ दो


..और कितना काम करोगी??

अब हमारी ज़िंदगी ऑफिस से घर और घर से ऑफिस हो गई है। खुद के लिए 2 मिनट का टाइम भी नहीं। अरे, किसके लिए कर रहे हो ये सब??

अपने लिए ही ना…तो थोड़ा टाइम खुद के लिए भी निकालो..

अब भी आप अगर ये सोच रहे हो कि मैं क्या बोल रही हूं तो ये पढ़ो पहले-

  • Money and Fame-  हम अपनी पूरी ज़िदंगी इन्हीं दो चीजों के पीछे भागते रहते हैं। अब आप शायद ये सोच रहे होंगे कि नहीं आप बाकी सभी से थोड़े अलग हैं। आपको अभी जितना मिल रहा है, आप उसी में खुश हैं। आपके लिए खुशियां ज़्यादा मायने रखती हैं।

PYzPL

  • अब ज़रा आप अपनी सपनों की दुनिया से बाहर निकलें। जिन खुशियों की आप बात कर रहे हैं, उनका भी रोकड़ा और फेम से कहीं न कहीं एक direct connection है। वैसे भी अब वो समय आ गया है, जहां बिना पैसों के खुशियां भी बेमानी सी लगती हैं। आपको शायद मेरी बात का यकीन न हो लेकिन कभी फुर्सत में इस बारे में ज़रूर सोचना, मेरी बात का यकीन खुद-ब-खुद हो जाएगा।

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  • तो अब मुद्दे की बात पर आते हैं। तो बात ये है कि आखिर हम खुद के साथ कर क्या रहे हैं? न सोने का टाइम, न खाने का, न दोस्तों से मिलने का(हफ्ते में एक बार दोस्तों से बात हो जाए, वो भी बड़ी बात है), न अपनी छोटी-छोटी ख्वाहिशें पूरी करने का, न अपने कुछ सपनों को जीने का, प्यार-मोहब्बत तो फिर भी दूर ही है।

mujhe kuch nai pta

  • सोने के लिए जाओ तो ऐसा लगता है कि पलक झपकाई और सुबह हो गई( आपका शरीर भी चिल्ला-चिल्लाकर बोल रहा होता है-भाई देख मेरी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही उठने की, मुझ पर कुछ तो रहम कर)..और हम इस आवाज़ को ignore करते हुए आखिरकार उठ ही जाते हैं। अब कर भी क्या सकते हैं.. 🙁

duniya ki aisi ki tessi

  • अब ऑफिस गए। पूरा दिन गधों की तरह काम करते हैं और दिन खत्म। फिर सोचते हैं O yaar दिन कब खत्म हुआ पता ही नहीं चला। इसके बाद मुर्दों की तरह घर की तरफ भागों। घर जाने पर हालत ऐसी होती है कि कोई खाना सीधे ही पेट में बिना चबाए पहुंचा दें। ohhhhh मैं उन दिनों के बारे में तो बताना ही भूल गए जब घर आकर भी आप गधों की तरह काम करते हैं(गधे शब्द का इस्तेमाल करने पर मुझे माफ करें, पर क्या है न कोई और शब्द मिल ही नही रहा)

rona

  • बुखार भी थक-हारकर ये कहते हुए चला जाता है- साला, बड़ा *** है..मैंने इतनी कोशिश की फिर भी एक दिन की छुट्टी नहीं ली गई इससे।( ऐसी सिचुएशन में ये भी होता है कि कभी-कभी बुखार चुपचाप चला जाता है या कभी-कभार वो भयंकर बीमारियों के रूप में आकर बदला लेता है। अब करके दिखाओ काम…hehe)

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  • तो पूरी तरह से लाइफ की बैंड बजी होती है। और जो थोड़ी-बहुत कमी रहती हैं वो आपको ऑफिस वाले या घर वालों आपकी थोड़ी और टेंशन देकर पूरी कर देते हैं।

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  • कितना ज़्यादा प्रैशर होता है या, इस उम्र तक successful होना है, इस उम्र तक हर हाल में शादी करनी है( आपकी मर्जी हो या ना), बेटा बच्चे पैदा करने की भी एक उम्र होती है(ये कभी मत भूलना) और उसके बाद आप कुछ सोचने के काबिल ही नहीं रहते, क्योंकि ज़िम्मेदारियों का बोझ ही इतना ज़्यादा हो जाता है।

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  • पहले इंडिपेंडेट होने के लिए पैसे कमाओ, फिर ज़रूरतें पूरी करने के लिए और आखिर में अपने मरने के बाद भी परिवार के लिए पूरा बंदोबस्त करके जाओ। मतलब पूरी ज़िंदगी इसी में ही चली जाती है।

Sirens Fury decisions

  • अब देखो, पैसा तो चाहिए यार। सारे सपने भी पूरे करने होते हैं, वरना दिल में एक अफसोस सा रह जाता है। ऐसे में बस खुद पर थोड़ी-सी मेहरबानी तो कर सकते हैं ना। ये काम, ज़िम्मेदारी और भागदौड़ तो पूरी लाइफ चलती रहेगी। ज़िंदगीभर हमें इस रेस में भागना है, ऐसे में थोड़ा सा समय खुद के लिए निकाल लो ना।

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हर दिन न सही, हफ्ते में एक दिन खुद के लिए। एक दिन नहीं तो कम से कम कुछ घंटे और इस एक दिन इनमें से कुछ ज़रूर ट्राई करना-

  • जो मन में आए वो करो। कुछ घंटों के लिए ही सही इस दुनिया की परवाह छोड़ दो। चिल्लाओ, नाचो, मस्ती करो, पागलपंती करो।

 

  • ये सब करने का मन नहीं है तो जी भर कर रो लो। यकीन मानिए, इससे भी काफी बार बड़ी खुशी मिलती है। अंदर जितना गुबार भरा पड़ा है, उसे आंसुओं में निकल जाने दो।

 

  • खुद को Pamper करो। इतना सबकुछ खुद के लिए ही कर रहे हो। याद रखना-कल कभी नहीं आएगा। ये मत सोचो- आज काम कर लेती हूं, कल खुद के लिए जीऊंगी। वो कल कभी नहीं आता और हम बस काम करते ही रह जाते हैं। इस काम के बीच में ही खुद के लिए कुछ समय निकाल लो।

 

  • अपनी छोटी-छोटी उन ख्वाहिशों को पूरा कर लो, जिनका पैसों और बाकी किसी ऐसी चीज से कोई लेना-देना नहीं है जो अभी हमारे पास नहीं है।

 

  • अपनी bucket list की तरफ थोड़ा-सा ध्यान दो..आज तक नहीं बनायी है तो बनायी औऱ बना ली है तो कुछ कर भी लो।

 

  • to-do-list को कुछ  समय के लिए बिल्कुल भूल जाओ। सबकुछ भूल जाओ। बस कुछ घंटों के लिए खुद को खुश करने में लग जाओ। जिस चीज से सबसे ज़्यादा खुशी मिलती है या थोड़ी सी भी खुशी मिलती है, वो करो।

 

  • खुद को स्पेशल फील कराए। किसी और के आने का इंतज़ार क्या करना, आप है ना- खुद को स्पेशल फील कराने के लिए।

 

    यकीन मानिए, खुद के साथ थोड़ा समय बिताने से आप खुद को और बेहतर समझने लगेंगे और frustation थोड़ी कम भी हो जाएगी। हां, एक बात खुद के साथ समय बिताने से मेरा मतलब दुखी होकर एक कमरे में खुद को बंद करके परेशान करने से नहीं है। आप अपनी खुशियों के लिए आप खुद ही ज़िम्मेदार हैं।

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    Pic credit- Google

One comment on ओ वुमनिया! कुछ घंटों के लिए ही सही इस दुनिया की परवाह छोड़ दो

  1. Divya says:

    Sachme yaar…zindagi ko jeena hi bhool gae hain..thanks jyoti ek baar fir refresh krne k lie..

Comments are closed.

ओ वुमनिया! कुछ घंटों के लिए ही सही इस दुनिया की परवाह छोड़ दो

..और कितना काम करोगी??

अब हमारी ज़िंदगी ऑफिस से घर और घर से ऑफिस हो गई है। खुद के लिए 2 मिनट का टाइम भी नहीं। अरे, किसके लिए कर रहे हो ये सब??

अपने लिए ही ना…तो थोड़ा टाइम खुद के लिए भी निकालो..

अब भी आप अगर ये सोच रहे हो कि मैं क्या बोल रही हूं तो ये पढ़ो पहले-

  • Money and Fame-  हम अपनी पूरी ज़िदंगी इन्हीं दो चीजों के पीछे भागते रहते हैं। अब आप शायद ये सोच रहे होंगे कि नहीं आप बाकी सभी से थोड़े अलग हैं। आपको अभी जितना मिल रहा है, आप उसी में खुश हैं। आपके लिए खुशियां ज़्यादा मायने रखती हैं।

PYzPL

  • अब ज़रा आप अपनी सपनों की दुनिया से बाहर निकलें। जिन खुशियों की आप बात कर रहे हैं, उनका भी रोकड़ा और फेम से कहीं न कहीं एक direct connection है। वैसे भी अब वो समय आ गया है, जहां बिना पैसों के खुशियां भी बेमानी सी लगती हैं। आपको शायद मेरी बात का यकीन न हो लेकिन कभी फुर्सत में इस बारे में ज़रूर सोचना, मेरी बात का यकीन खुद-ब-खुद हो जाएगा।

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  • तो अब मुद्दे की बात पर आते हैं। तो बात ये है कि आखिर हम खुद के साथ कर क्या रहे हैं? न सोने का टाइम, न खाने का, न दोस्तों से मिलने का(हफ्ते में एक बार दोस्तों से बात हो जाए, वो भी बड़ी बात है), न अपनी छोटी-छोटी ख्वाहिशें पूरी करने का, न अपने कुछ सपनों को जीने का, प्यार-मोहब्बत तो फिर भी दूर ही है।

mujhe kuch nai pta

  • सोने के लिए जाओ तो ऐसा लगता है कि पलक झपकाई और सुबह हो गई( आपका शरीर भी चिल्ला-चिल्लाकर बोल रहा होता है-भाई देख मेरी बिल्कुल हिम्मत नहीं हो रही उठने की, मुझ पर कुछ तो रहम कर)..और हम इस आवाज़ को ignore करते हुए आखिरकार उठ ही जाते हैं। अब कर भी क्या सकते हैं.. 🙁

duniya ki aisi ki tessi

  • अब ऑफिस गए। पूरा दिन गधों की तरह काम करते हैं और दिन खत्म। फिर सोचते हैं O yaar दिन कब खत्म हुआ पता ही नहीं चला। इसके बाद मुर्दों की तरह घर की तरफ भागों। घर जाने पर हालत ऐसी होती है कि कोई खाना सीधे ही पेट में बिना चबाए पहुंचा दें। ohhhhh मैं उन दिनों के बारे में तो बताना ही भूल गए जब घर आकर भी आप गधों की तरह काम करते हैं(गधे शब्द का इस्तेमाल करने पर मुझे माफ करें, पर क्या है न कोई और शब्द मिल ही नही रहा)

rona

  • बुखार भी थक-हारकर ये कहते हुए चला जाता है- साला, बड़ा *** है..मैंने इतनी कोशिश की फिर भी एक दिन की छुट्टी नहीं ली गई इससे।( ऐसी सिचुएशन में ये भी होता है कि कभी-कभी बुखार चुपचाप चला जाता है या कभी-कभार वो भयंकर बीमारियों के रूप में आकर बदला लेता है। अब करके दिखाओ काम…hehe)

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  • तो पूरी तरह से लाइफ की बैंड बजी होती है। और जो थोड़ी-बहुत कमी रहती हैं वो आपको ऑफिस वाले या घर वालों आपकी थोड़ी और टेंशन देकर पूरी कर देते हैं।

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  • कितना ज़्यादा प्रैशर होता है या, इस उम्र तक successful होना है, इस उम्र तक हर हाल में शादी करनी है( आपकी मर्जी हो या ना), बेटा बच्चे पैदा करने की भी एक उम्र होती है(ये कभी मत भूलना) और उसके बाद आप कुछ सोचने के काबिल ही नहीं रहते, क्योंकि ज़िम्मेदारियों का बोझ ही इतना ज़्यादा हो जाता है।

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  • पहले इंडिपेंडेट होने के लिए पैसे कमाओ, फिर ज़रूरतें पूरी करने के लिए और आखिर में अपने मरने के बाद भी परिवार के लिए पूरा बंदोबस्त करके जाओ। मतलब पूरी ज़िंदगी इसी में ही चली जाती है।

Sirens Fury decisions

  • अब देखो, पैसा तो चाहिए यार। सारे सपने भी पूरे करने होते हैं, वरना दिल में एक अफसोस सा रह जाता है। ऐसे में बस खुद पर थोड़ी-सी मेहरबानी तो कर सकते हैं ना। ये काम, ज़िम्मेदारी और भागदौड़ तो पूरी लाइफ चलती रहेगी। ज़िंदगीभर हमें इस रेस में भागना है, ऐसे में थोड़ा सा समय खुद के लिए निकाल लो ना।

giphy

हर दिन न सही, हफ्ते में एक दिन खुद के लिए। एक दिन नहीं तो कम से कम कुछ घंटे और इस एक दिन इनमें से कुछ ज़रूर ट्राई करना-

  • जो मन में आए वो करो। कुछ घंटों के लिए ही सही इस दुनिया की परवाह छोड़ दो। चिल्लाओ, नाचो, मस्ती करो, पागलपंती करो।

 

  • ये सब करने का मन नहीं है तो जी भर कर रो लो। यकीन मानिए, इससे भी काफी बार बड़ी खुशी मिलती है। अंदर जितना गुबार भरा पड़ा है, उसे आंसुओं में निकल जाने दो।

 

  • खुद को Pamper करो। इतना सबकुछ खुद के लिए ही कर रहे हो। याद रखना-कल कभी नहीं आएगा। ये मत सोचो- आज काम कर लेती हूं, कल खुद के लिए जीऊंगी। वो कल कभी नहीं आता और हम बस काम करते ही रह जाते हैं। इस काम के बीच में ही खुद के लिए कुछ समय निकाल लो।

 

  • अपनी छोटी-छोटी उन ख्वाहिशों को पूरा कर लो, जिनका पैसों और बाकी किसी ऐसी चीज से कोई लेना-देना नहीं है जो अभी हमारे पास नहीं है।

 

  • अपनी bucket list की तरफ थोड़ा-सा ध्यान दो..आज तक नहीं बनायी है तो बनायी औऱ बना ली है तो कुछ कर भी लो।

 

  • to-do-list को कुछ  समय के लिए बिल्कुल भूल जाओ। सबकुछ भूल जाओ। बस कुछ घंटों के लिए खुद को खुश करने में लग जाओ। जिस चीज से सबसे ज़्यादा खुशी मिलती है या थोड़ी सी भी खुशी मिलती है, वो करो।

 

  • खुद को स्पेशल फील कराए। किसी और के आने का इंतज़ार क्या करना, आप है ना- खुद को स्पेशल फील कराने के लिए।

 

    यकीन मानिए, खुद के साथ थोड़ा समय बिताने से आप खुद को और बेहतर समझने लगेंगे और frustation थोड़ी कम भी हो जाएगी। हां, एक बात खुद के साथ समय बिताने से मेरा मतलब दुखी होकर एक कमरे में खुद को बंद करके परेशान करने से नहीं है। आप अपनी खुशियों के लिए आप खुद ही ज़िम्मेदार हैं।

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    Pic credit- Google
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