Gulzar@82: आपसे ज़िदंगी ‘गुलज़ार’ है


हर संगीतकार, गीतकार, शायर, डायरेक्टर का एक दौर होता है। अपने दौर में वो बुलंदियों को छूता है और फिर वक्त के साथ उस सितारे की चमक धुंधली पड़ जाती है।

मगर गुलज़ार साहब एक ऐसे इंसान हैं, जिन्होंने इस बात को गलत साबित किया है। गुलज़ार साहब ने ज़माने को सिखाया है कि 81 साल का एक कवि या शायर कैसे ज़माने से कदम मिला सकता है और अपने शब्दों की खुशबू से लोगों को महका सकता है।

उनके जन्मदिन के मौके पर हमने उनकी कुछ नज़्में आपके लिए चुनी है और इसके साथ ही गुलज़ार साहब की कुछ ऐसी बातें , जिनके बारे में शायद आप नहीं जानते।

 

  • बहुत कम लोग ही जानते हैं कि गुलज़ार साहब का असल नाम संपूर्ण सिंह कालरा है।

gulzar

 

  • गुलज़ार ने मुंबई में अपने शुरूआती दिनों में एक मोटर गैराज में काम किया है। वह एक स्थानीय दुकानदार से 4 आने हर हफ्ते के हिसाब से पढ़ने के लिए किताबें किराए पर लेते थे। गुलज़ार साहब ने एक इंटरव्यू में कहा था,”उस दुकानदार ने अनजाने में मुझे ऐसी किताब दे दी, जिसने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी।” वह किताब थी रविंद्रनाथ टैगोर की Gardner..

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  • अपने पिता की मृत्यु के समय गुलज़ार साहब मुंबई में थे। उनके परिवार वालों ने उन्हें इस बात की ख़बर नहीं दी थी। कई दिनों एक पड़ोसी से उन्हें अपने पिता की मृत्यु की ख़बर मिली।

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  • फ़िल्मी दुनिया में सबसे मशहूर लेखक, गीतकार और निर्देशकों में से एक गुलज़ार कभी भी फ़िल्मों के लिए नहीं लिखना चाहते थे। मशहूर निर्देशक विमल रॉय के कहने पर न चाहते हुए उन्हें फ़िल्मों के लिए लिखना पड़ा। वहीं से उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में अपनी फ़िल्मी पारी की शुरूआत की।

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  • इस बात को कम ही लोग जानते हैं कि अपनी नज़्मों से लोगों को दीवाना बनाने वाले गुलज़ार एक बेहतरीन टेनिस खिलाड़ी हैं। वह लगभग हर दिन दो घंटे टेनिस कोर्ट पर गुज़ारते हैं। उन्होंने हाल ही में अपने टैनिस क्लब की चैंपियनशिप भी जीती है।

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  • वह भारत के इकलौते गीतकार हैं, जिन्हें प्रतिष्ठित ऑस्कर पुरस्कार से नवाज़ा गया है। उन्हें यह पुरस्कार स्लमडॉग मिलेनियर के गाने #JaiHo के लिए ए आर रहमान के साथ संयुक्त रूप से दिया गया।

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  • यह भी एक कमाल ही है कि हिंदी भाषा में इतनी अच्छी पकड़ रखने वाले गुलज़ार साहब ने अपनी ज़िंदगी में ज़्यादार किताबें उर्दू भाषा में पढ़ी हैं।

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  • 1999 में आयी फिल्म हू तू तू गुलज़ार साहब के निर्देशन में बनी आखिरी फ़िल्म थी। बकौल गुलज़ार, “फ़िल्म के प्रोड्यूसर ने उस फ़िल्म पर इतनी कैंची चलवाई कि उसके बाद मेरा फ़िल्म बनाने से मन ही हट गया।”

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  • गुलज़ार के पाली हिल पर बने बंगले “बोस्कियाना” का नाम उनकी बेटी बोस्की (मेघना गुलज़ार) के नाम पर रखा गया है।

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  • गुलज़ार साहब मशहूर संगीतकार और निर्देशक विशाल भारद्वाज को अपने बेटे की तरह मानते हैं। विशाल की हर फ़िल्म में गुलज़ार साहब की कलम का जादू होता है। बकौल गुलज़ार, “विशाल ने मेरे शब्दों को ज़िंदा रखा है।

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The Moi की तरफ से गुलज़ार साहब को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं…भगवान आपको स्वस्थ और खुश रखें और आप यूं ही इस ज़माने को अपने शब्दों की खुशबू से महकाते रहें।

 

Photo: Suraj Singh & Sunitha

5 comments on Gulzar@82: आपसे ज़िदंगी ‘गुलज़ार’ है

  1. Vinita Bhat says:

    Being a Gulzar fan this article gave me goose bumps while I was reading it.Very beautifully and eloquently written.Thanks Atul for this alluring and touching article,
    P.S Happy birthday Gulzar Sahab

  2. Atul says:

    आपका स्वागत है विनीता जी

  3. Rashi says:

    Describing a man of words in words!!! Simple and truly amazing….From Tagore ‘s work to Peeli Dhoop..words penned by Gulzar are immortal..
    I read you for the first time…and would definitely look forward to more such writings..:) ALL THE BEST..

  4. Vikas jha says:

    Bahut khoob Atul bhai ye padhna ke bad gulzar sahab ke bare me bahut achi bate pata chal gai jo pahle pata nahi thi
    Bahut dhanyawad ye likhne ke liye

  5. Vikas jha says:

    I want to see u a renowned writer in future my friend Atul.
    All the best

Comments are closed.

Gulzar@82: आपसे ज़िदंगी ‘गुलज़ार’ है

हर संगीतकार, गीतकार, शायर, डायरेक्टर का एक दौर होता है। अपने दौर में वो बुलंदियों को छूता है और फिर वक्त के साथ उस सितारे की चमक धुंधली पड़ जाती है।

मगर गुलज़ार साहब एक ऐसे इंसान हैं, जिन्होंने इस बात को गलत साबित किया है। गुलज़ार साहब ने ज़माने को सिखाया है कि 81 साल का एक कवि या शायर कैसे ज़माने से कदम मिला सकता है और अपने शब्दों की खुशबू से लोगों को महका सकता है।

उनके जन्मदिन के मौके पर हमने उनकी कुछ नज़्में आपके लिए चुनी है और इसके साथ ही गुलज़ार साहब की कुछ ऐसी बातें , जिनके बारे में शायद आप नहीं जानते।

 

  • बहुत कम लोग ही जानते हैं कि गुलज़ार साहब का असल नाम संपूर्ण सिंह कालरा है।

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  • गुलज़ार ने मुंबई में अपने शुरूआती दिनों में एक मोटर गैराज में काम किया है। वह एक स्थानीय दुकानदार से 4 आने हर हफ्ते के हिसाब से पढ़ने के लिए किताबें किराए पर लेते थे। गुलज़ार साहब ने एक इंटरव्यू में कहा था,”उस दुकानदार ने अनजाने में मुझे ऐसी किताब दे दी, जिसने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी।” वह किताब थी रविंद्रनाथ टैगोर की Gardner..

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  • अपने पिता की मृत्यु के समय गुलज़ार साहब मुंबई में थे। उनके परिवार वालों ने उन्हें इस बात की ख़बर नहीं दी थी। कई दिनों एक पड़ोसी से उन्हें अपने पिता की मृत्यु की ख़बर मिली।

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  • फ़िल्मी दुनिया में सबसे मशहूर लेखक, गीतकार और निर्देशकों में से एक गुलज़ार कभी भी फ़िल्मों के लिए नहीं लिखना चाहते थे। मशहूर निर्देशक विमल रॉय के कहने पर न चाहते हुए उन्हें फ़िल्मों के लिए लिखना पड़ा। वहीं से उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में अपनी फ़िल्मी पारी की शुरूआत की।

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  • इस बात को कम ही लोग जानते हैं कि अपनी नज़्मों से लोगों को दीवाना बनाने वाले गुलज़ार एक बेहतरीन टेनिस खिलाड़ी हैं। वह लगभग हर दिन दो घंटे टेनिस कोर्ट पर गुज़ारते हैं। उन्होंने हाल ही में अपने टैनिस क्लब की चैंपियनशिप भी जीती है।

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  • वह भारत के इकलौते गीतकार हैं, जिन्हें प्रतिष्ठित ऑस्कर पुरस्कार से नवाज़ा गया है। उन्हें यह पुरस्कार स्लमडॉग मिलेनियर के गाने #JaiHo के लिए ए आर रहमान के साथ संयुक्त रूप से दिया गया।

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  • यह भी एक कमाल ही है कि हिंदी भाषा में इतनी अच्छी पकड़ रखने वाले गुलज़ार साहब ने अपनी ज़िंदगी में ज़्यादार किताबें उर्दू भाषा में पढ़ी हैं।

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  • 1999 में आयी फिल्म हू तू तू गुलज़ार साहब के निर्देशन में बनी आखिरी फ़िल्म थी। बकौल गुलज़ार, “फ़िल्म के प्रोड्यूसर ने उस फ़िल्म पर इतनी कैंची चलवाई कि उसके बाद मेरा फ़िल्म बनाने से मन ही हट गया।”

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  • गुलज़ार के पाली हिल पर बने बंगले “बोस्कियाना” का नाम उनकी बेटी बोस्की (मेघना गुलज़ार) के नाम पर रखा गया है।

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  • गुलज़ार साहब मशहूर संगीतकार और निर्देशक विशाल भारद्वाज को अपने बेटे की तरह मानते हैं। विशाल की हर फ़िल्म में गुलज़ार साहब की कलम का जादू होता है। बकौल गुलज़ार, “विशाल ने मेरे शब्दों को ज़िंदा रखा है।

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The Moi की तरफ से गुलज़ार साहब को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं…भगवान आपको स्वस्थ और खुश रखें और आप यूं ही इस ज़माने को अपने शब्दों की खुशबू से महकाते रहें।

 

Photo: Suraj Singh & Sunitha

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