Dhondu, Just Chill: इस इंटरव्यू में संजय मिश्रा का अंदाज है ज़रा हटके, आपको प्यार हो जाएगा इनकी सादगी से


Oye Dhondu, just chill and watch this interview

संजय मिश्रा, एक ऐसा इंसान जिन्हें कुछ साल पहले तक लोग सिर्फ चेहरे से पहचानते थे। नाम बहुत कम लोगों को पता था, हम उन्हें टीवी पर, फ़िल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाओं में देखकर खूब हंसते थे। उस समय हमने कभी ये जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर ये कलाकार कौन है। मैंने उन्हें एप्पल सिंह बने हुए देखा, फिर ऑफिस ऑफिस में भी वो खूब जमे। उसके बाद उनकी कई फ़िल्मों ने मुझे खूब हंसाया। फिर मैंने आंखों देखी फ़िल्म देखी और मैं उनका अभिनय देखकर हैरान रह गई।

अपनी लगातार मेहनत और बेहतरीन अभिनय से संजय मिश्रा एक स्थापित कलाकार बन चुके हैं। अब वो किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।  जो लोग उन्हें नाम से नहीं भी जानते हैं, वो उन्हें बाबू जी कह लेते हैं।

यह भी पढ़ें- The Razak Khan I Knew: ये शायद कॉमेडियन रज़ाक खान का आखिरी इंटरव्यू है, RIP

उनसे मिलने से पहले मैं थोड़ी डरी हुई थी। मेरे लिए वो शुरूआत से ही काफी बड़े कलाकार रहे हैं। रास्ते भर मैं यही सोच रही थी कि कोई गलती हो गई तो, कैमरा अच्छे से सेट नहीं किया तो, मैं बोलते-बोलते कहीं अटक गई तो और पता नहीं क्या-क्या सवाल मेरे दिलों-दिमाग में घूम रहे थे।

जैसे ही मैं मेट्रो स्टेशन पहुंची, मिश्रा जी के यहां से मुझे एक फोन कॉल आया ये पूछने के लिए कि अभी आप कहां पहुंची हैं। मुझे मेट्रो स्टेशन से कुछ कदमों की दूरी पर एक जगह रूकने के लिए कहा गया और वहीं मुझे लेने के लिए एक कार पहुंची।

फिर मैं उनके घर पहुंची और उन्होंने बड़े अच्छे से मेरा स्वागत किया। मेरा हालचाल पूछने के बाद उन्होंने मुझे चाय ऑफर की। अब चाय के लिए मैं कभी मना नहीं कर पाती।

जब तक चाय बन रही थी, मैं कैमरे की सेटिंग करने लगी। वहां मिश्रा जी के कुछ दोस्त भी थी। मिश्रा जी और उनके दोस्तों ने खुद ही लाइट के अनुसार कैमरे की सैटिंग की, कुर्सियां लगाईं और कैमरा एंगल भी खुद सेट किया। (और तब तक मेरी आधी नर्वसनेस खत्म हो गई थी।)

 जब मैं मिश्रा जी के इंट्रो की भूमिका बांध रही थी, तो मैं बार-बार अटक रही थी। तब उन्होंने मुझे बोला-बेटा पहले रिलेक्स हो जाओ, आराम से एक बार फिर पढ़ो और फिर अच्छे से बोलो।

यह भी पढ़ें-  इंटरव्यू: आपने ‘द ग्रेट खली’ का ये मज़ाकिया अंदाज पहले कभी नहीं देखा होगा

इस तरह ये इंटरव्यू शुरू हुआ और फिर सवाल-जवाबों का सिलसिला थमा नहीं और हमारी हंसी रुकी नहीं। इंटरव्यू के आखिर में मिश्रा जी बोले- “ऐसा लग रहा था मानो मैं अपनी ही बच्ची को परीक्षा में पास करा रहा हूं।”

और फिर मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। आपसे मिलना, मेरी ज़िंदगी के अच्छे अनुभवों में से एक है।

अब आप इंटरव्यू देखें और इसके बाद कमेंट बॉक्स में ये बताना न भूलें कि आपको संजय मिश्रा जी से मुलाकात कैसी लगी-

यह भी पढ़ें- अरे दादा! दरोगा हप्पू सिंह का ये इंटरव्यू नहीं देखा तो क्या देखा

Dhondu, Just Chill: इस इंटरव्यू में संजय मिश्रा का अंदाज है ज़रा हटके, आपको प्यार हो जाएगा इनकी सादगी से

Oye Dhondu, just chill and watch this interview

संजय मिश्रा, एक ऐसा इंसान जिन्हें कुछ साल पहले तक लोग सिर्फ चेहरे से पहचानते थे। नाम बहुत कम लोगों को पता था, हम उन्हें टीवी पर, फ़िल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाओं में देखकर खूब हंसते थे। उस समय हमने कभी ये जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर ये कलाकार कौन है। मैंने उन्हें एप्पल सिंह बने हुए देखा, फिर ऑफिस ऑफिस में भी वो खूब जमे। उसके बाद उनकी कई फ़िल्मों ने मुझे खूब हंसाया। फिर मैंने आंखों देखी फ़िल्म देखी और मैं उनका अभिनय देखकर हैरान रह गई।

अपनी लगातार मेहनत और बेहतरीन अभिनय से संजय मिश्रा एक स्थापित कलाकार बन चुके हैं। अब वो किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।  जो लोग उन्हें नाम से नहीं भी जानते हैं, वो उन्हें बाबू जी कह लेते हैं।

यह भी पढ़ें- The Razak Khan I Knew: ये शायद कॉमेडियन रज़ाक खान का आखिरी इंटरव्यू है, RIP

उनसे मिलने से पहले मैं थोड़ी डरी हुई थी। मेरे लिए वो शुरूआत से ही काफी बड़े कलाकार रहे हैं। रास्ते भर मैं यही सोच रही थी कि कोई गलती हो गई तो, कैमरा अच्छे से सेट नहीं किया तो, मैं बोलते-बोलते कहीं अटक गई तो और पता नहीं क्या-क्या सवाल मेरे दिलों-दिमाग में घूम रहे थे।

जैसे ही मैं मेट्रो स्टेशन पहुंची, मिश्रा जी के यहां से मुझे एक फोन कॉल आया ये पूछने के लिए कि अभी आप कहां पहुंची हैं। मुझे मेट्रो स्टेशन से कुछ कदमों की दूरी पर एक जगह रूकने के लिए कहा गया और वहीं मुझे लेने के लिए एक कार पहुंची।

फिर मैं उनके घर पहुंची और उन्होंने बड़े अच्छे से मेरा स्वागत किया। मेरा हालचाल पूछने के बाद उन्होंने मुझे चाय ऑफर की। अब चाय के लिए मैं कभी मना नहीं कर पाती।

जब तक चाय बन रही थी, मैं कैमरे की सेटिंग करने लगी। वहां मिश्रा जी के कुछ दोस्त भी थी। मिश्रा जी और उनके दोस्तों ने खुद ही लाइट के अनुसार कैमरे की सैटिंग की, कुर्सियां लगाईं और कैमरा एंगल भी खुद सेट किया। (और तब तक मेरी आधी नर्वसनेस खत्म हो गई थी।)

 जब मैं मिश्रा जी के इंट्रो की भूमिका बांध रही थी, तो मैं बार-बार अटक रही थी। तब उन्होंने मुझे बोला-बेटा पहले रिलेक्स हो जाओ, आराम से एक बार फिर पढ़ो और फिर अच्छे से बोलो।

यह भी पढ़ें-  इंटरव्यू: आपने ‘द ग्रेट खली’ का ये मज़ाकिया अंदाज पहले कभी नहीं देखा होगा

इस तरह ये इंटरव्यू शुरू हुआ और फिर सवाल-जवाबों का सिलसिला थमा नहीं और हमारी हंसी रुकी नहीं। इंटरव्यू के आखिर में मिश्रा जी बोले- “ऐसा लग रहा था मानो मैं अपनी ही बच्ची को परीक्षा में पास करा रहा हूं।”

और फिर मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। आपसे मिलना, मेरी ज़िंदगी के अच्छे अनुभवों में से एक है।

अब आप इंटरव्यू देखें और इसके बाद कमेंट बॉक्स में ये बताना न भूलें कि आपको संजय मिश्रा जी से मुलाकात कैसी लगी-

यह भी पढ़ें- अरे दादा! दरोगा हप्पू सिंह का ये इंटरव्यू नहीं देखा तो क्या देखा

Scroll to top